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रविवार, 31 मई 2009

पुस्तक चर्चा

’दक्षिण भारत के पर्यटन स्थल’ का चौथा संस्करण

’दक्षिण भारत के पर्यटन स्थल’ का चौथा संस्करण हाल ही में प्रवीण प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली-११००२ से प्रकाशित हुआ है। यह यात्रा संस्मरण पुस्तक है, जिसका शीर्षक मैंने ’सागर के आस-पास’ रखा था, लेकिन किन्ही व्यासायिक कारणों से मेरी सहमति से प्रकाशक ने इसका उपरोक्त शीर्षक चुना। शायद इस बात का उन्हें लाभ भी मिला। इसका प्रथम संस्करण २००० में प्रकाशित हुआ था। इसके बाद इसका दूसरा संस्करण २००४ में, तीसरा फरवरी,२००८ और चौथा फरवरी, २००९ में प्रकाशित हुआ। प्रस्तुत है पुस्तक के संबन्ध में वरिष्ठ कथाकार और कवि सुभाष नीरव की संक्षिप्त टिप्पणी :





दक्षिण भारत के पर्यटन स्थल




वरिष्ठ हिंदी लेखक रूपसिंह चन्देल ने इस पुस्तक में साहित्यिक कलात्मकता से भरपूर अपने यात्रा-संस्मरणों के ज़रिये दक्षिण भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों से जुड़ी तथ्यपरक सूचनाओं को न केवल बेहद रोचक और सरल ढंग से कलमबद्ध किया है बल्कि उन स्थलों से जुड़े ऐतिहासिक-पौराणिक कालखंडों को भी प्रामाणिकता के साथ खंगालने की कोशिश की है। लेखक ने उन स्थलों की वर्तमान स्थितियों - सामाजिक, राजनैतिक ,धार्मिक और आर्थिक स्थितियों का भी विस्तृत और कथात्मक विवरण प्रस्तुत किया है। भाषा और शैली इतनी चित्रात्मक है कि पढ़ते हुए पाठक को ऐसा प्रतीत होता है मानो वह सचमुच में इन रमणीय और मनोहारी स्थलों की यात्रा कर रहा हो...
-सुभाष नीरव

1 टिप्पणी:

pran ने कहा…

Dakshin baarat ke paryatan sthal par Shri Sbhash
Neerav kee bebaaq tippani padhee.jab bhasha aur
shailee chitratmak ho to pustak padhne ke liye
mangvaanee padegee.